Sunday, 19 June 2016

दूरियां


                "दो जवां दिलो का ग़म दूरियां समझती हैं
                  कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं"

              "तुम तो खुद ही क़ातिल हो तुम ये बात क्या जानो 
                 क्यों हुआ मै दीवाना बेड़ियां समझती हैं"

                "यूं तो सैर ए गुलशन को कितने लोग आते हैं 
                  फूल कौन तोड़ेगा डालियां समझती हैं "

                












Sunday, 1 May 2016

उदास


            " है अख्तियार में तेरे तो मोजिज़ा कर दे,
                 वो शख्स मेरा नहीं है उसे मेरा कर दे "
  
            "ये रेत ज़ार कहीं ख़त्म ही नहीं होता 
                ज़रा सी दूर तो रस्ता हरा भरा कर दे"

            "अकेली शाम बहोत जी उदास करती है 
               किसी को भेज दो कोई मेरा हम नवा कर दे"  







Sunday, 24 April 2016

घरौंदे

  

"बग़ैर मेरे तुझे चैन आ नहीं सकता 
      मेरा जवाब कही से तू ला  नहीं सकता "

  "हज़ार परदे भी डालों अगर बनावट के
           दिलों की बात को चेहरा छुपा नहीं सकता "

         "बना दिया है ज़माने ने दिल को पत्थर का  
              सताए जितना भी मुझको, रुला नहीं सकता"

" हसी ताज महल को बनाने वाला भी 
   दिलों के टूटे घरौंदे बना नहीं सकता"