"मेरी तरफ से आप सभी लोगों को ईद उल फ़ित्र की दिली मुबारकबाद "
"दो जवां दिलो का ग़म दूरियां समझती हैं
कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं"
"तुम तो खुद ही क़ातिल हो तुम ये बात क्या जानो
क्यों हुआ मै दीवाना बेड़ियां समझती हैं"
"यूं तो सैर ए गुलशन को कितने लोग आते हैं
फूल कौन तोड़ेगा डालियां समझती हैं "
" है अख्तियार में तेरे तो मोजिज़ा कर दे,
वो शख्स मेरा नहीं है उसे मेरा कर दे "
"ये रेत ज़ार कहीं ख़त्म ही नहीं होता
ज़रा सी दूर तो रस्ता हरा भरा कर दे"
"अकेली शाम बहोत जी उदास करती है
किसी को भेज दो कोई मेरा हम नवा कर दे"