Wednesday, 5 September 2012


"उनसे नहीं मिलेगे अब हम मचल मचल के,
करते है बात हमसे वो रुख बदल बदल के"

"उसकी जुदाई का गम तडपा रहा है मुझको,
दरिया से बन गए है आसू निकल निकल कर"

"वो हमसे गुफ्तगू को राज़ी तो हो गए है,
अब मोम हो गया है पत्थर पिघल पिघल के"

"उनकी शरारतो पर सओ जान है निछावर,
चलते है वो दिलो को जबसे कुचल कुचल कर"।

Monday, 3 September 2012



प्यार के सिलसिले को जिंदा कर,
रोज़ मिल मुझसे न बिछड़ा  कर,

उंगलियों से हवा के कागज़ पर,
एक ख़त मुझको भी रोज़ लिखा कर"

बिखरे ख्वाबों में कुछ बचा ही नहीं,
अब न इन तितलियों का पीछा कर"


"हवाओं में जुल्फों को लहरा रहे है,
  हसीं आज कितने नज़र आ रहे है"

"न जाने चले आए क्यों बन संवर के 
 चमन में फूल भी शर्मा रहे है"

"ये राजे मोहब्बत कहीं खुल न जाए,
मेरा नाम सुनके वो शर्मा रहे हैं"

"सबक प्यार का हमने जिनको पढ़ाया,
मोहब्बत वो गैरों से फरमा रहे हैं"

"दिये ज़ख्म ऐसे मुझे उसने सदफ,
की आखों से आसू बहे जा रहे है।"