Wednesday, 31 October 2012

इत्तेफ़ाक़



"वो इत्तेफ़ाक़ से रस्ते में मिल गया था मुझे

मैं देखता था उसे और वो देखता था मुझे" 



"अगरचे उसकी नज़र में थी न आशनाई 


मैं जानता हूँ कि बरसों से जानता था मुझे" 



"तलाश कर न सका फिर मुझे वहाँ जाकर 


ग़लत समझ के जहाँ उसने खो दिया था मुझे"

 

"बिखर चुका था अगर मैं तो क्यों समेटा था


मैं पैरहन था शिकस्ता तो क्यों सिया था मुझे" 



"है मेरा हर्फ़-ए-तमन्ना, तेरी नज़र का क़ुसूर 


तेरी नज़र ने ही ये हौसला दिया था मुझे"

Sunday, 28 October 2012

मुहब्बत




"होठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते

साहिल पे समंदर के ख़ज़ाने नहीं आते।"



'पलके भी चमक उठती हैं सोते में हमारी


आंखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते।

"

"दिल उजडी हुई इक सराय की तरह है


अब लोग यहां रात बिताने नहीं आते।"



"उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में


फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते।

"

"इस शहर के बादल तेरी जुल्फ़ों की तरह है


ये आग लगाते है बुझाने नहीं आते।"



"क्या सोचकर आए हो मुहब्बत की गली में


जब नाज़ हसीनों के उठाने नहीं आते।"



"अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गये है


आते है मगर दिल को दुखाने नहीं आते।"

"अंगड़ाई"




"अंगड़ाई भी वो ले न सकी उठा के हाथ,

देखा जो मुझ को छोड दिया मुस्कुरा के हाथ"