Sunday, 24 April 2016
Sunday, 27 March 2016
फासले
"फासले कभी ऐसे भी होंगे मैंने सोचा न था,
सामने बैठा था मेरे फिर भी वो मेरा न था"
"वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चारो ओर
मैं उसे महसूस कर सकता था अपने आस पास "
"आज उसने दर्द भी अपने मुझसे अलग कर लिए
आज मैं रोया तो मेरे साथ वो रोया न था "
"याद करके उसको और भी तकलीफ होती है मुझे,
भूल जाने के सिवा अब और कोई चारा न था"
Monday, 7 March 2016
शबनम
"कभी गुंचा, कभी शोला, कभी शबनम की तरह ,
लोग मिलते है बदलते हुए मौसम की तरह"
"मेरे महबूब मेरे प्यार को इलज़ाम न दे ,
हिज्र में ख़ुशी भी मनाई है ग़मों की तरह "
"मैंने खुशबू की तरह तुझ को किया है महसूस,
दिल ने चाहा है तेरी याद को शबनम की तरह "
"कैसे हमदर्द हो तुम ,कैसे मसीहा हो तुम
दिल पे नश्तर भी लगाते हो मरहम की तरह"
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