Saturday, 16 July 2016

ख्वाब





"ख्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है ,
ऐसी तनहाई कि  मर जाने को जी चाहता है "

"घर की वहशत से लरज़ता हूँ मगर जाने क्यूँ,
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है "

"डूब जाऊं तो कोई मौज निशाँ तक न बताये,
ऐसी नदी में उतर जाने को जी चाहता है" 

















Wednesday, 6 July 2016

ईद



"मेरी तरफ से आप सभी लोगों को ईद उल फ़ित्र की दिली मुबारकबाद "

Sunday, 19 June 2016

दूरियां


                "दो जवां दिलो का ग़म दूरियां समझती हैं
                  कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं"

              "तुम तो खुद ही क़ातिल हो तुम ये बात क्या जानो 
                 क्यों हुआ मै दीवाना बेड़ियां समझती हैं"

                "यूं तो सैर ए गुलशन को कितने लोग आते हैं 
                  फूल कौन तोड़ेगा डालियां समझती हैं "