Tuesday, 8 January 2013

मुद्दत



"इतनी मुद्दत बाद मिले हो,
किन सोच में रहते  हो"

"तेज़ हवा ने मुझ से पुछा, 

 रेत पे क्या लिखते रहते हो"

"कौन सी  बात है तुम में ऐसी, 

इतने अच्छे क्यों लगते हो"

" हम से न पूछो हिज्र के किस्से, 

अपनी कहो अब तुम कैसे हो।"

Sunday, 6 January 2013

बदलता वक़्त


"बदलते वक़्त का इक सिलसिला सा लगता है 
 कि जब भी देखो उसे तो दूसरा सा लगता है" 

"तुम्हारा हुस्न किसी आदमी का हुस्न नहीं 
ये किसी बुज़ुर्ग की सच्ची दुआ सा लगता है"

"तेरी निगाह को तमीज़ रंगों नूर कहाँ 
मुझे तो खून भी रंगे हिना सा लगता है" 

"वो चाहत पे आ गया बेताब हो कर आखिर 
खुदा भी आज शरीके दुआ सा लगता है" 

"तुम्हारा हाथ जो आया है  हाथ में मेरे
अब एतबार का मौसम हरा सा लगता है "

"निकल के देखो कभी नफरतों के पिंजरे से
तमाम शहर का मंज़र खुला सा लगता है " 








Saturday, 5 January 2013

दिल एक खिलौना










"मेरा दिल  भी शौक़ से तोड़ो एक तजुर्बा और सही ,
लाख खिलोने  तोड़ चुके हो एक खिलोना और सही" 

"रात है ग़म की आज बुझा दो जलता हुआ हर एक चिराग़ ,

दिल में अँधेरा हो ही चुका है घर में अँधेरा और सही" 

"दम है निकलता है एक आशिक का भी,दिल है आ कर देख तो लो ,

लाख तमाशे देखे होंगे एक नज़ारा और सही"

"खंजर लेकर सोचते क्या हो क़त्ल मुराद भी कर डालो ,

दाग हैं सॊ दामन पे तुम्हारे एक इज़ाफा और सही।"