Friday, 11 September 2015

निगाहो


             "साफ़ ज़ाहिर है निगाहो से कि हम मरते है
              मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते है"

            "दूसरोँ से न देखी गयी कभी अपनी ख़ुशी 

                    अब ये हालत है कि हम हसते हुए डरते हैं "

                   "गुज़रे लम्हों ने जा के न किया याद हमें 

                      फिर भी शिददत से उन्हें हम याद किया करते हैं "





Sunday, 6 September 2015

खुशबू


"रंगत तेरी ज़ुल्फो की घटाओं ने चुराई ,
   खुशबू तेरे आँचल से हवाओं ने उड़ाई "

  "थम थम के बरसना कभी झम झम के बरसना ,

     सावन को अदा ये मेरे अश्कों ने सिखाई "

    "कैदी तेरी ज़ुल्फ़ों का हूँ आज़ाद जहाँ से,

        मुझको ये रिहाई तो वफ़ाओं  ने दिलाई"  










Saturday, 5 September 2015

डगर


"ना कोई रास्ता  न कोई डगर है यहाँ ,
मगर क़िस्मत  में सबकी सफर है यहाँ"

"सुनाई देंगी न उनको मेरे दिल की सदा 

दिमाग में उनके बसा है कोई और यहाँ "

"पकड़ के ऊगली उनकी कहीं  दूर चलें 

रास्ता  ये ही लगता है मुझको मोतबर यहाँ"